55 साल पुराना है दुर्गा पूजा का इतिहास।
कहानी

55 साल पुराना है दुर्गा पूजा का इतिहास।

प्रखंड में दुर्गा पूजा के इतिहास 55 साल पुराना है प्रखंड मुख्यालय बस्ती में थाना के समीप वर्ष 1967 में तत्कालीन भंडार के थानेदार डी लाल ने स्थानीय ग्रामीण जगनिवास शर्मा गौरी नंदन शर्मा गोवर्धन अधिका बोधन महतो बेला साहू आदि स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पूजा की शुरुआत की थी।

इसके बाद से लेकर आज तक लगातार पूजा होती आ रही है अब पर खंडवा स्थानीय लोगों के सहयोग से दिनों दिन पूजा पंडाल की भव्यता और दुर्गा पूजा में रौनक बढ़ते ही जा रही है वर्ष 1967 में दुर्गा पूजा की शुरुआत साधारण सी झोपड़ी नुमा पंडाल का निर्माण किया गया था।

जो अब भव्य पंडाल और विद्युत सज्जा से सुशोभित होता है कमेटी का निर्माण कर वर्ष 1983 से रावण दहन का कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था रावण दहन से पूर्व गौरी नंदन शर्मा द्वारा राम लीला कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था अब प्रखंड में दुर्गा पूजा की भव्यता काफी बढ़ गई है।

जिसे देखने के लिए प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र के गांव से भी काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं इस वर्ष पंडाल में नवयुवक संघ दुर्गा पूजा समिति के अलावा थाना परिसर में भी युवा निर्माण समिति का गठन कर दुर्गा पूजा मनाने की तैयारी की जा रही है।

इसके तहत प्रतिमा निर्माण के साथ-साथ पंडाल का निर्माण का कार्य चल रहा है दशमी के दिन थाना के समीप भव्य रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है रावण दलहन व मेला देखने के लिए आसपास के कई गांव के ग्रामीण पहुंचते हैं।

भोरों, बेदाल व चट्टी में दुर्गा पूजा का आयोजन होता है भी था वह आदमी महामुनि के दिन भैंस की बलि दी जाती है और मेले का आयोजन होता है जबकि दसवीं के दूसरे दिन चट्टी में जतरा का आयोजन होता है

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