जमीन का सीमांकन सरकारी अमीन से कैसे करवाएं
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जमीन का सीमांकन सरकारी अमीन से कैसे करवाएं। जानें पूरी नियम

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बताने वाले हैं कि “रैयती जमीन क्या होता है? भूमि सीमांकन सरकारी अमीन से कराना चाहिए या प्राइवेट अमीन से? आप अपने निजी जमीन का सीमांकन करवा सकते हैं या सरकारी का भी? जमीन का सीमांकन में नोटिस कितने दिन पहले किया जाता है? आवंटित भूमि सीमांकन कैसे करें? भूमि सीमांकन कराने हेतु कितने रुपया का फीस लगता है ? भूमि सीमांकन के नियम क्या है? आप अपने जमीन का सरकारी अमीन से मापी कैसे करवा सकते हैं? How to get the land demarcated by Government Amin?”

रैयती जमीन क्या होता है?

What is ryoti ground? साधारण भाषा में कहें तो “जो आपकी निजी जमीन होती है जिनका दस्तावेज आपके नाम होता है और पूरा मालिकाना हक आपको होता है। वह जमीन आपकी रैयती जमीन कहलाएगी और आप उस जमीन का रैयत कहलायेंगे।”

रैयती जमीन की मापी सरकारी अमीन से कराना चाहिए या प्राइवेट से?

दोस्तों यदि आप प्राइवेट अमीन से मापी करवाते हैं और आपके विपक्षी उस सीमांकन को नहीं मानता है। या यूं कहें कि आपके जमीन के अगल बगल में जो जमीन है, उसके मालिक उस मापी को नहीं मानता है। तो फिर मापी या सीमांकन का यह सिलसिला चलता रहता है। एक बार आप अमीन लाते हैं फिर वह लाएगा इसमें आपको परेशानी एवं खर्च ज्यादा होता है। दूसरी बात यह है प्राइवेट अमीन से नापी करवाने पर कानूनी दस्तावेज में वह मापी मान्य नहीं होता है।

प्राइवेट अमीन मापी को कई दिनों तक खींचता है जिससे आपको पैसे भी ज्यादा लगते हैं। अमूमन देखा गया है कि प्राइवेट अमीन प्रतिदिन का ₹2000 चार्ज करते हैं। इसलिए मेरा सुझाव है यदि आपकी जमीन के सीमांकन में कोई बड़ा विवाद नहीं है तो आप प्राइवेट अमीन से मापी करवा सकते हैं। किंतु यदि कोई विवाद है या आपके जमीन के अगल-बगल के जमींदार मापी को नहीं मानते हैं तो आप सरकारी अमीन से मापी करवा सकते हैं।

निजी जमीन का सीमांकन करवा सकते हैं या सरकारी का भी?

आप केवल अपनी निजी जमीन की मापी करवा सकते हैं। सरकारी जमीन की मापी आप नहीं करवा सकते हैं। हां यदि वहां के जनसमूह चाहे तो कई लोगों के समूह को मिलाकर जनप्रतिनिधि से अनुशंसा करवा कर तब सरकारी जमीन की मापी करवा सकते हैं।

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अपने जमीन का सरकारी अमीन से मापी कैसे करवा सकते हैं?

मापीके लिए अमूमन आपको सरकार द्वारा निर्धारित फार्म भरकर अपने जमीन का सभी दस्तावेज की छाया प्रति स्व अभिप्रमाणित करते हुए, आधार कार्ड के साथ सभी विपक्षी जिनका आपसे सीमांकन को लेकर विवाद है, एवं आपके जमीन के चारों और जो भी जमींदार हैं उनका नाम, पिता का नाम और पूरा पता भरकर अंचल कार्यालय में जमा करना होता है। यह फॉर्म कैसे मिलेगा यह हम आपको आगे बताने वाले हैं। आप चाहें तो सादे कागज पर भी आवेदन लिख सकते हैं।

भूमि सीमांकन के नियम क्या है?

पूरा प्रोसेस पढ़ने के लिए बिहार सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस की कॉपी डाउनलोड करने के लिए डाउनलोड बटन पर क्लिक करें

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नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आप फार्म डाउनलोड कर प्रिंट कर लें। उसको इस आर्टिकल के अंत में दिए गए वीडियो को देखकर भरना एवं वीडियो में बताए गए सभी दस्तावेजों के साथ अंचल कार्यालय में जमा करें।

आपका आवेदन पत्र अंचल कार्यालय में जमा होने के 1 सप्ताह से 10 दिन बाद भूमि सीमांकन हेतु नोटिस वादी एवं प्रतिवादी को दिया जाता है। इसके बाद दोनों पक्षों को जनता दरबार में उपस्थित होना पड़ता है एवं अपना अपना पक्ष रखना पड़ता है।

भूमि सीमांकन कराने हेतु कितने रुपया का फीस लगता है?

सभी पक्षों को सुनने के बाद अंचलाधिकारी आपको भूमि सीमांकन हेतु फीस जमा करने का आदेश देता है। यह फीस कितनी होगी यह क्षेत्र पर निर्भर करता है। हमारे एरिया में यह फीस ₹1400 है। आदेश के 1 सप्ताह के अंदर अंचल नजारत कार्यालय या बैंक चालान के माध्यम से फीस जमा कर उनकी पावती पुनः अंचल कार्यालय में जमा करना होता है। इसके बाद अंचलाधिकारी सरकारी अमीन को मापी हेतु आदेश देते हैं।

आदेश के 15 दिन से 30 दिन के अंदर सरकारी अमीन को प्लॉट पर जाकर मापी कर सीमांकन करना होता है और मापी के बाद 3 दिन के भीतर अंचल कार्यालय में प्रतिवेदन नक्शा सहित समर्पित करना होता है। यदि किसी पक्षकार को इस मापी से कोई आपत्ति होती है तो वह भूमि सुधार उप समाहर्ता के पास तीस दिनों के अंदर अपील दर्ज करवा सकते हैं। नीचे दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक कर आप फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।

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