एक पत्रकार, मुख्यमंत्री के द्वार,
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एक पत्रकार, मुख्यमंत्री के द्वार, शर्म करो सरकार

गणपत कुमार, अररिया। कहा जाता है कि पत्रकार के कलम से न्याय की दिप जलती है। लेकिन क्या हो जब एक पत्रकार को न्याय के लिए मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंचना परे और वहाँ भी सिर्फ आश्वाशन हीं मिले। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यह सुशासन की सरकार है या आश्वासन की? जब एक पत्रकार को स्थानीय प्रशासन न्याय नहीं दिलवा सकी, कार्यवाही के जगह केवल खानापूर्ति की गई। पहले तो निष्पक्ष जांच की जगह बिना पड़ताल के काउंटर केश दर्ज कर लिया गया। और बाद में भी उचित कार्यवाही के जगह थाना से बेल दे दिया गया।

ऐसे ऐसे अजूबे खेल एक पत्रकार के केस में हो रहा हो तो एक आम जनता जो थाना जाने से पहले सौ बार सोच विचार करते हैं उनके लिए तो न्याय पाना मिल का पत्थर साबित होता होगा। जिसका अंदाजा सुशाशन बाबू सत्ता के नशे में तो कतई नहीं लगा सकते। ऐसा इसलिए क्योंकि न्याय पाने के लिए एक पत्रकार को मुख्यमंत्री तक पहुंचने और एक ईमानदार कलमकार की तरह बेबाक होकर अररिया पुलिस के भरष्टाचार के खुलासे से सिर्फ आश्वाशन मिलना इसका प्रमाण है।

क्या है मामला

जिला के भरगामा थाना क्षेत्र के शंकरपुर वार्ड 07 निवासी (23) वर्षीय युवा पत्रकार अंकित सिंह ने 04 जुलाई सोमवार को मुख्यमंत्री के जनता दरबार कार्यक्रम पटना में उपस्थित होकर भरगामा थाना में 16 मई 2021 को दर्ज कांड संख्या 67/21 मामले को लेकर अररिया पुलिस की जमकर बेइज्जती किया, कहा सर अन्य जिला की तुलना में अगर अररिया जिला का तुलना करें तो सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी अररिया जिला का पुलिस करता है,कहा सर आप खुद हीं समझिये उस अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ा है कि बेवजह एक पत्रकार के घर में घुस कर पत्रकार सहित उनके परिवार के साथ मारपीट एवं जानलेवा हमला व लूट-पाट कर यह सब शिकायत पुलिस से करने पर जान से मारने का धमकी दिया।

एफआईआर में धारा 379 फिर भी हो गया खेल

पत्रकार अंकित सिंह के मामले में पत्रकार द्वारा दर्ज एफआईआर में धारा 379 लगा है। जो एक संज्ञेय और गैरजमानतीय अपराध की श्रेणी में आता है।

“379 एक संज्ञेय और गैरजमानतीय अपराध है इस धारा के रहते हुए आरोपी को थाने से बेल मिलना अपनेआप में अनोखा है।” सीताराम प्रसाद, अधिवक्ता, उच्चन्यायालय पटना।

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