एग्ज़िट पोल
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एग्ज़िट पोल इसलिए बदल सकती हैं, जानें कैसे किए जाते हैं और कितने सही

एग्ज़िट पोल कैसे किए जाते हैं और कितने सही। बिहार विधानसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है. शनिवार को आख़िरी और तीसरे चरण के मतदान के बाद अब सभी मतदाताओं ने नेताओं की चुनावी किस्मत को बैलेट बॉक्स और ईवीएम में बंद कर दिया है.

10 नवम्बर को बिहार की जनता का जनादेश देश के सामने आएगा लेकिन आख़िरी चरण के मतदान और नतीजों की तारीख़ के बीच एक और दिन सामने आता है और वो है एग्ज़िट पोल का दिन.

मतदान के आख़िरी दिन वोटिंग की प्रक्रिया ख़त्म होने के आधे घंटे के भीतर तमाम न्यूज़ चैनलों पर एग्ज़िट पोल दिखाए जाने लगते हैं.

दरअसल, ये एग्ज़िट पोल आने वाले चुनावी नतीजों का एक अनुमान होता है और बताता है कि मतदाताओं का रुझान किस पार्टी या गठगबंधन की ओर जा सकता है. न्यूज़ चैनल तमाम सर्वे एजेसियों के साथ मिलकर ये कराते हैं.

ये सर्वे कई बार नतीजों से बिल्कुल मेल खाते हैं तो कभी उनके उलट होते हैं. ऐसे में हमने एग्ज़िट पोल की पूरी प्रक्रिया समझने की कोशिश की.

बिहार विधानसभा चुनाव एग्ज़िट पोल 2020
बिहार विधानसभा चुनाव एग्ज़िट पोल 2020

सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार कहते हैं कि एग्ज़िट पोल को लेकर जो धारणा है वो है ये कि मतदाता जो वोट देकर पोलिंग बूथ से बाहर निकलते हैं उनसे बात की जाती है.

सर्वे में कई सवाल मतदाता से पूछे जाते हैं लेकिन उनमें सबसे अहम सवाल होता है कि आपने वोट किसे दिया है. हज़ारों वोटर्स से इंटरव्यू करके आंकड़े जुटाए जाते हैं, इन आंकड़ों का विश्लेषण करके ये वोटिंग का अनुमान निकालते हैं यानी ये पता लगाते हैं कि इस पार्टी को कितने प्रतिशत वोटरों ने वोट किया है.

एग्ज़िट पोल करने, आंकड़े जुटाने और उन आंकड़ों को आप तक ले आने में एक लंबी मेहनत और प्रक्रिया होती है.

ऐसा नहीं है कि हर बार एग्ज़िट पोल सही ही साबित हुए हैं. इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव.

2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों के बाद एग्ज़िट पोल में भाजपा के बंपर जीत का अनुमान लगाया गया था. पोलिंग एजेंसी चाणक्य ने भाजपा को 155 और महागठबंधन को महज 83 सीटों पर जीत की भविष्यवाणी की थी.

वहीं नीलसन और सिसरो ने 100 सीटों पर भाजपा की जीत का अनुमान लगाया था लेकिन नतीजे बिल्कुल विपरीत रहे थे.

जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के महागठबंधन ने कुल 243 सीटों में से 178 पर जीत हासिल की थी.

यह बड़ी जीत थी और एग्ज़िट पोल और असल नतीजों में काफ़ी अंतर देखने को मिला था.

आख़िर एग्ज़िट पोल बड़े स्तर गलत कैसे हो जाते हैं? इस सवाल पर संजय कहते हैं, ”एग्ज़िट पोल के फ़ेल होने का सबसे बेहतर उदाहरण है 2004 का लोकसभा चुनाव. इस चुनाव में एग्ज़िट पोल के आंकड़े ग़लत साबित हुए. एग्ज़िट पोल में कहा जा रहा था कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरेगा, लेकिन नतीजे हम सबको पता हैं. कांग्रेस की सीटें अधिक आईं और यूपीए सबसे बड़ा गठबंधन साबित बना.”

2015 के बिहार चुनाव में ज़्यादातर एग़्ज़िट पोल के अनुमान ग़लत हुए थे.

”आप देखेंगे कि ज़्यादातर वहीं एग्ज़िट पोल फ़ेल हुए हैं जिनमें बीजेपी की जीत का अनुमान लगाया जाता है. एग्ज़िट पोल में हम पोलिंग बूथ से निकल कर बाहर आए मतदाताओं से बात करते हैं. ऐसे में जो मतदाता मुखर होता है वो ज़्यादा बातें करता है.”

”आप देखेंगे कि बीजेपी का मतदाता ज़्यादातर शहरी, ऊंचे तबके का, पढ़ा-लिखा, युवा होता हैं. आप देखेंगे कि सोशल कॉन्फ़िडेंस वाले लोग खुद आकर अपनी बात रखते हैं. वहीं गरीब, अनपढ़ और कम अत्मविश्वास वाला मतदाता चुपचाप वोट देकर चला जाता है. उसका सर्वे करने वालों तक खुद जाने की संभावना कम होती है ऐसे में सर्वे करने वालों को ये ख्याल रखना ज़रूरी होता है कि वह हर तबके के मतदाताओं से बात करे.”

मतदान को गुप्तदान कहा जाता है, ऐसे में मतदाताओं से ये जान पाना कि वो किसे वोट देंगे ये भी एक चुनौती होती है. कई बार वो सच बता रहे हैं या नहीं इस पर भी संशय होता है.

लेकिन संजय इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखते वो कहते हैं कि ज़्यादातर मतदाता सच बोलते हैं. ये हो सकता है कि कोई मतदाता झूठ बोल दे, मज़ाक कर दे लेकिन मैं नहीं मानता कि जब किसी वोटर हम जाकर बात करते हैं तो उसे झूठ बोलने में कोई आनंद आता है. मतदाता ने सच बोला या झूठ इसका फ़ैसला चुनाव नतीजों के बाद साफ़ हो जाता है. अगर आप पिछले 10-15 सालों के एग्ज़िट पोल को देखेंगे तो करीब-करीब सभी एग्ज़िट पोल के अनुमान नतीजों के आगे-पीछे ही आए.

सही साबित हुए एग्ज़िट पोल

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2018 में चुनाव नतीजे आए. तीनों राज्यों में कांग्रेस ने सरकार बनाई.

तीन प्रमुख न्यूज़ चैनल्स- ‘इंडिया टुडे-आज तक’, रिपब्लिक टीवी और एबीपी के अपने-अपने एग्जिट पोल में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में जीतता दिखाया गया .

इन तीनों न्यूज़ चैनल्स ने क्रमश: एक्सिस इंडिया, सी-वोटर और सीएसडीएस से अपने अपने सर्वेक्षण कराए.

एग्जिट पोल
छत्तीसगढ़ के एग्ज़िट पोल के आकलन उलझे हुए दिखाए गए. ज़्यादातर चैनलों के एग्ज़िट पोल मान रहे थे कि चुनाव नतीजे से छत्तीसगढ़ में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति सामने आएगी.

सिर्फ़ एबीपी न्यूज़ और इंडिया टीवी के सर्वेक्षण बता रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार चौथी बार सत्ता में आएगी और उसे कामचलाऊ बहुमत मिल जाएगा.

2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में भी नतीजे एग्ज़िट पोल के रुझान एक जैसे ही थे. हालांकि कांग्रेस और बीजेपी की सीटों का अंतर बेहद कम था लेकिन राज्य में बीजेपी की ही सरकार बनी.

इंडिया न्यूज़-सीएनएक्स के एग्ज़िट पोल में गुजरात में भाजपा को 110 से 120 और कांग्रेस को 65-75 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था.

टाइम्स नाऊ-वीएमआर के एग्ज़िट पोल में भाजपा को 115 और कांग्रेस को 65 सीटें मिलती दिखाई गईं.

न्यूज़ 18-सीवोटर के एग्ज़िट पोल में भाजपा को 108 और कांग्रेस को 74 सीटें का अनुमान लगाया गया.

इंडिया टुडे-माय एक्सिस ने भाजपा को 99 से 113 और कांग्रेस को 68 से 82 सीटों का अनुमान दिया.

न्यूज़ 24- चाणक्य ने भाजपा को 135 और कांग्रेस को 47 सीटों का अनुमान जताया.

साल 2016 में पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए थे. इस चुनाव के असल नतीजे #एग्ज़िट_पोल के काफ़ी क़रीब रहे थे.

चाणक्य के एग्ज़िट पोल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के 210 सीटों पर जीत के अनुमान लगाए थे. वहीं इंडिया टुडे-एक्सिस ने यह संख्या 243 बताई थी.

ये सारे अनुमान सरकार बनाने के जादुई आंकड़ों से अधिक थे और कमोबेश ये सही भी साबित हुए. ममता बनर्जी की पार्टी ने 211 सीटों पर जीत हासिल की थी.

हालांकि सारे अनुमान दूसरे नंबर पर रही पार्टी के मामले में ग़लत साबित हुए. एग्ज़िट पोल्स यह सटीक अनुमान नहीं लगा पाए कि उपविजेता कितनी सीटें जीतेगा.

इंडिया टुडे-एक्सिस को छोड़कर सभी एग्ज़िटपोल लेफ़्ट और कांग्रेस को 100 से अधिक सीट दे रहे थे, लेकिन असल नतीजों में लेफ़्ट और कांग्रेस को महज़ 44 सीटें मिली थीं.

साल 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के बाद लगभग सभी एग्ज़िट_पोल में भाजपा की जीत के प्रबल अनुमान लगाए गए थे. और नतीजे भी ऐसे ही रहे.

बड़ी पार्टी कोई और सरकार किसी और की

कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों के असल परिणाम के कुछ महीने पहले कई राजनीतिक वैज्ञानिकों ने तर्क दिया था कि विजेता की भविष्यवाणी के हिसाब से यह चुनाव सबसे कठिन था.

एबीपी-सी वोटर ने 110 सीटों पर भाजपा के जीत के अनुमान लगाए थे, वहीं 88 सीटों पर कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी की गई थी.

दूसरी तरफ इंडिया टुडे-एक्सिस के #एग्ज़िट_पोल में 85 पर भाजपा और 111 सीटों पर जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के जीत के अनुमान लगाए गए थे.

हालांकि चुनावों के असल परिणाम अलग रहे. इसमें भाजपा को उम्मीद से अधिक सफलता मिली थी. भाजपा 100 से ज़्यादा सीटों पर जीत का परचम लहराने में कामयाब रही थी, हालांकि वो सरकार नहीं बना पाई.

चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी.

प्रत्येक चुनाव परिणाम का सटीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल होता है.

संजय कुमार मानते हैं कि कभी कभी एग्ज़िट पोल ग़लत होते हैं लेकिन इन्हें ऐसे समझना चाहिए कि अगर नतीजों में एग्जिट पोल की सीटें सटीक नहीं आईं लेकिन रुझान उसी ओर आया तो उसे ग़लत नहीं कहना चाहिए बल्कि वह भी सही एग्ज़िट पोल ही होता है.

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